शनिवार, जनवरी 02, 2010

मैं बस मैं हूँ


















परी हूं मैं , हूं ,पर हूं अपने ही ख्यालों में ,
आसमा शहर,रहती हूं चाँद के आशियाने में

मत सोचो कोंन हूं, कैसी हूं, रहती हूं कहाँ ??
पहेली हूँ मैं,डोलती हूं मैं तारों की डोली में!


झीने -झीने से चांदनी से बने पंख हैं मेरे
ओस और जुगनू सजे हैं मेरे पैराहन में !


पास है सोच मेरी और हैं साथ सादा से ख्याल
कागज़ है फर्श ए दिल,मोरपंखी कलम है हाथ में !

रकास- ए -फलक से कभी - कभी मिलती हूं
"बांसुरी" से मिलती हूं अक्सर मैं आवाज़ में !


न हीरे मोतियों की , न उम्मीद सोने चांदी की
गिरे रहते हैं सितारे अक्सर यूहीं मेरी झोली में !

हकीकत का सबक मैं असल दुनिया से लेती रहती हूं
यहाँ जीती हूं मैं अपने ही अलग परियों के अंदाज़ में !

मैं बस मैं हूँ .....मैं जो बस .." सिर्फ मैं " हूँ ,
परी हूं मैं यहाँ, बस रहने दो मुझे मेरे ही ख्यालों में
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2 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

परी जी !
बहुत प्यारी सी है दुनिया आपकी ...प्यारा सा है आशियाना भी .......
चाँद से कुछ गीत मेरे लिए भी माँग कर ले आना ......
सजाऊंगा उन्हें .....अपने होठों पर
सुनाऊंगा सारी दुनिया को .....
बताऊँगा ......कि कैसी होती है ......रचनाकारों की दुनिया.

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

baba...........aapka ye comment maine aaj praa......shaayd us waqt ..is bloggr duniya me nyi thi..so ptaa nhi chlaa....

hmmm
thaku baba..............aurr haan..aapne sjaaye geet ...dhanywad