मंगलवार, दिसंबर 28, 2010

पलाश के फूल****आईये इसके बारे जाने



पलाश के फूल
पलाश के फूल मेरे पसंदीदा फूल है ...इसीलिए सोचा इसके बारे में लिखूं..और आप सब को भी इसका परिचय करवाऊं ...वैसे इससे आप सब (अधिकतर लोग) परिचित ही होंगे .

Scientific Name - (Butea monosperma)बुटेया  मोनोस्पर्मा 
( संस्कृत  : किंशुक, हिंदी  : पलाश )

ये इन नामो से भी जाना जाता है == पलाश , ढाक  , पलाह , Flame of the Forest, Bastard Teak, Parrot Tree, केशु  (पंजाबी ) and केसुदो  (गुजुराती).

इसके फूल 2.5 cm लम्बे , चटक लाल संतरी रंग के होते हैं !

उपयोग और विशेषताएं =टिम्बर ..रेसिन....फौडर...दवाइयां ...रंग (डाई)

पलाश के पेड़ की गोंद ..कमरकस ..कई व्यंजनों में प्रयोग की जाती है .ये बंगाल कीनो ...के नाम से भी जानियो जाती है ..(considered valuable by druggists because of its astringent qualities, and by leather workers .
पलाश की कुछ और भी प्रजातियाँ हैं जिनमें श्वेत और पीले पुष्प होते हैं. संतरी रंग वाले पुष्पों का प्रयोग कंट्रासेप्टिव की तरह भी किया जाता है इनकी दो और विशेषताएं हैं १- इनके बीज बहुत अच्छे अन्ठेल्मिन्थिक (कृमिनाशक ) होते हैं .२- बीजों का चूर्ण एजिंग-फैक्टर को डिले करता है, अतः वार्धक्य जन्य रोगों में इनका प्रयोग किया जाता है(जानकारी -कौशलेन्द्र मिश्रा जी द्वारा)

पलाश के फूल होली में रंग बनाने के काम आते हैं...हिमाचल में कहावत है के ...कपड़ा फट जाए पर टेसू का रंग ना जाए .

The wood is dirty white and soft and, being durable under water, is used for well-curbs and water scoops. Good charcoal can be made from it.

 
  • पश्चिम बंगाल में पलाश  बसन्त मौसम का प्रतीक है  
  • रबिन्द्रनाथ  टैगोर  जी ने पलाश के फूलों को आग के फूलों से लिंक किया था 
  •  पलाशी शहर का नाम इस पेड़ के नाम से है .जहाँ पर प्रख्यात "पलासी की लड़ाई ""बैटल ऑफ़ पलासी " हुई .
  • ये माना जाता है की ये पलाश के पेड़ अग्नि देव का अवतार है.. It was a punishment given to Him by Goddess Parwati   for disturbing Her and Lord Shiva 's privacy .
  • केरला के नम्बूदिरी( केरला के ब्र्हामिन) के घरों में ये आम पाया जाता है ..क्यूंकि ये वहांकी धार्मिक क्रियाओं में बहुत प्रयोग में लाया जाता है खासतौर में आग या हवन में डालने के लिए .केरला में इन्हें पलासु या चमाता कहते हैं ..संस्कृत में चमाता का अर्थ है आग में डालने वाले छोटे छोटे टुकड़े  (अग्निहोत्र)

    . (references -विकिपिडिया)



 पलाश के फूल दिसम्बर में इतने खूबसूरत नही दिखते क्यूंकि तब तक इनके फूल झड़ जाते हैं...जनवरी के अंत से मार्च तक इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है


पलाश के फूल --मेरी रचनाओं में ....

पलाश के फूल मेरे पसंदीदा फूल है ..इनमे अच्छी  खुशबू नही होती ,,,,और बहुत जल्दी सूख भी जाते हैं..फिर भी ये मेरे पंसदीदा हैं..
पलाश के फूल ....के नाम से मैंने अब तक पांच रचनाएँ लिखी हैं...इनमे से दो ..अब तक अपने इस ब्लॉग में प्रकाशित कर चुकी हूं....
आप सब ने मेरी दोनों ही रचनाओं को बहुत स्नेह दिया ...इसके लिए आप सब का तह ए दिल से शुर्किया .और उम्मीद  है  ...मेरी अगली रचनाओं पर भी आप स्नेह  बनाये  रखेंगे !

        "चाँद के माथे पे चमकती है ज्यूँ सूरज की धुल
 यूँ खिलते है मेरी कविताओं में पलाश के फूल"




12 टिप्‍पणियां:

कौशलेन्द्र ने कहा…

ब्यूटिया मोनोस्पर्मा की कुछ और भी प्रजातियाँ हैं जिनमें श्वेत और पीले पुष्प होते हैं. संतरी रंग वाले पुष्पों का प्रयोग कंट्रासेप्टिव की तरह भी किया जाता है इनकी दो और विशेषताएं हैं १- इनके बीज बहुत अच्छे अन्ठेल्मिन्थिक (कृमिनाशक ) होते हैं .२- बीजों का चूर्ण एजिंग-फैक्टर को डिले करता है, अतः वार्धक्य जन्य रोगों में इनका प्रयोग किया जाता है.
....पलाश को मैं भी बहुत पसंद करता हूँ .....इसपर एक छोटी सी रचना लिखी थी बहुत पहले .....आज रात को पोस्ट करूंगा.

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (30/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट..नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

bhut hi achi jaankari....palash ke phool ke baare me...thnks

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

हमारे यहाँ इसे ढाक या टेसू भी कहते है!
--
यह पोस्ट बहुत जानकारी देती हुई लगी!

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

यह पोस्ट बहुत जानकारी देती हुई लगी!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट ..काफी जानकारी मिली ...

भ्रांतिमान अलंकार पढते हुए याद किया था ..

किंसुक कुसुम जान कर लपका भंवर कीर की लाल चोंच पर .
तोते ने निज ठौर चलाई जामुन का फल उसे समझ कर .

shikha varshney ने कहा…

काफी अच्छी जानकारी मिल गई .आभार
आपको नववर्ष की ढेरों शुभकामनाएं.

venus****"ज़ोया" ने कहा…

mujhe bahut khushi hui ke..mere aise lekh ko bhi aap sab ne itna sneh diya..aap sab ka aabhar

अनुपमा पाठक ने कहा…

अच्छी पोस्ट!

abhi ने कहा…

अरे वाह इतनी बढ़िया जानकारी एक फूल की...मजा आ गया :)
ये बात जानकार अच्छा लगा - पश्चिम बंगाल में पलाश बसन्त मौसम का प्रतीक है

दूसरी वाली फोटो(फूलों की)तो बहुत सुन्दर लगी...

इमरान अंसारी ने कहा…

क्या बात है अ से ज्ञ तक बताया है आपने तो पलाश के बारे में ……धन्यवाद इतनी अच्छी जानकारी शेयर करने के लिए । लगता है जैसे इस पर भी रिसर्च कर ली है :-)))