बुधवार, मई 20, 2020

समय की हवा



जाते-जाते 
समय की हवा 
अपने साथ 
कितना कुछ ले गयी 
कुछ यादें कुछ ज़ख्म 
दे गयी मुझे 
रिश्तों के मरहम 
अपने साथ ले गयी। 

आँखों को नपाई 
हाथों को लगन 
युहीं सुलझा लेती हूँ  
कई गणित कठन 
हुनर कैसे-कैसे दे गयी 
बालों का काजल 
आँखों की चमक 
अपने साथ ले गयी। 

गंभीर  स्थिर मन 
इक चुप्पी सी गहन 
प्रौढ़ता के सारे गुण  
समय से पहले दे गयी 
वो खुमारी, वो चुभन 
वो चांदनी की छुअन 
चटक रंग सब  बसंत 
अपने साथ ले गयी। 

आँखों में थकन,
माथे पे शिकन,
रिश्तों में ग्रहण 
मवाद कैसे-२ भर गयी 
पलाश सा तेज़न,
उजले से सपन,
उमंगों की अगन 
अपने साथ ले गयी। 

जून का महीना 
धूप की खान 
यादों का नमक 
मेरे नाम कर गयी। 
जाते-जाते 
समय की हवा 
अपने साथ 
  कितना कुछ ले गयी


:-ज़ोया 


P.C @Google  images 





18 टिप्‍पणियां:

  1. पूरी रचना में एक दर्द है जोया जी ..जो अन्तर्मन की सतह को रचना के हर पदबंद के साथ स्पर्श करता
    है । बहुत मार्मिक सृजन । वैश्विक महामारी कोरोना के समय में अपना व अपनो का ख्याल रखियेगा ।

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  2. नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 21 मई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  3. नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 21 मई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी

    आपसे सराहना पाना अपने आप में उपलब्धि है बहुत बहुत धनयवाद

    ब्लॉग तक आने रचना को सराहने के लिए ह्रदय से आदर



    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जानो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे। .

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  5. Meena Bhardwaj जी

    ब्लॉग तक आने रचना को सराहने के लिए ह्रदय से आदर
    रचना को आपने ओतने गहरई से पढ़ा मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। ..लिखना सार्थक हुआ
    युहीं उत्साह बढ़ाते रहे
    धन्यवाद

    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जानो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे। .

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  6. Ravindra Singh Yadav जी

    ब्लॉग तक आने रचना को सराहने के लिए ह्रदय से आदर
    रचना को आपने अपनी चयन की लिंक्स में जगह के काबिल समझा। .धन्यवाद
    युहीं उत्साह बढ़ाते रहे


    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जानो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे। .

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  7. आँखों में थकन,
    माथे पे शिकन,
    रिश्तों में ग्रहण
    मवाद कैसे-२ भर गयी
    पलाश सा तेज़न,
    उजले से सपन,
    उमंगों की अगन
    अपने साथ ले गयी। बहुत सुंदर और सार्थक सृजन 👌

    जवाब देंहटाएं
  8. सुशील कुमार जोशी जी

    ब्लॉग तक आने और रचना को सराहने के लिए ह्रदय से आदरसहित धन्यवाद

    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जनो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे। .

    जवाब देंहटाएं
  9. Anuradha chauhan जी
    रचना को समय दे कर पढ़ने और सराहने के लिएआभार
    ब्लॉग तक आने ह्रदय से आदरसहित धन्यवाद

    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जनो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे। .

    जवाब देंहटाएं
  10. Meena Bhardwaj जी


    बहुत बहुत धन्यवाद
    यही उत्साह बढ़ाती रहे और साथ देती रहे
    सादर आभार

    जवाब देंहटाएं
  11. आदरणीया जोया जी, आपने अंतर्मन की भावनाओं की छटपटाहट को गहराई से व्यक्त किया है। ये पंक्तियाँ :
    हुनर कैसे-कैसे दे गयी
    बालों का काजल
    आँखों की चमक
    अपने साथ ले गयी। --ब्रजेंद्र नाथ

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  12. भावों की पीड़ा शब्दों से उकेरता हृदय स्पर्शी सृजन सखी.
    बहुत ही उम्दा अभिव्यक्ति.
    सादर

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  13. Marmagya - know the inner self ब्रजेंद्र नाथ जी


    रचना के मर्म को समझने, रचना को समय दे कर पढ़ने और सराहने के लिए आभार
    ब्लॉग तक आने के लिए ह्रदय से आदरसहित धन्यवाद

    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जनो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे।

    जवाब देंहटाएं
  14. अनीता सैनी थजी



    सखी मानने के लिए आभार। ..आज के समय में ये रिश्ता बहुत काम नसीब होता हैं
    आपसे ियने प्यारे शब्द पा कर बहुत प्रसन्नता हुयी .. उत्साह बढ़ाते रहे। ...
    ब्लॉग तक आने के लिए ह्रदय से आदरसहित धन्यवाद


    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जनो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे।

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  15. ये तो समय है जो अपना खाता बराबर कर जाता है ... कुछ देता है तो कुछ ले भी जाता है ... और ऐसा करने से समय को कोई रोक भी नहीं पाता है ... गहरे भाव ...

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  16. दिगंबर नासवा जी


    सत्य वचन

    रचना को समय दे कर पढ़ने और सराहने के लिए आभार
    हमेषा की तरह उत्साह बढ़ाने के लिए आभार
    ब्लॉग तक आने के लिए ह्रदय से आदरसहित धन्यवाद

    कोविड -१९ के इस समय में अपने और अपने परिवार जनो का ख्याल रखें। .स्वस्थ रहे।

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