बुधवार, दिसंबर 15, 2010

आओ ना बच्चों सा खेलें


आओ ना बच्चों सा खेलें
.
आओ ना हम लफ़्ज़ों से खेलें
जुमलों के बना बना के गुच्छे
मारे हम इक -दूजे पे सेध के
इम्लाओं की रस्सी पक्की सी
बना के रस्सी टप्पा दोनों खेलें

आओ ना बच्चों सा खेलें

अन्ताक्षरी खेलेंगे शायरी की
शुरू करना तुम इक मतले से
मक़ता मैं ही अक्सर बोलूंगी
मिसरे से मिसरा जोड़ जोड़ के
गजलों की गज्लाक्षरी हम खेलें

आओ ना बच्चों सा खेलें

बचपन के छुटे खेल-साथी  सारे
अब सारे रकीब हुए फिरते हैं
तुम आये हो मेरे दोस्त बनके
जिन्दगीं अब खिलखिलाती है 
आओ फिर दोस्ती दोस्ती खेलें

आओ ना बच्चों सा खेलें
.
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जुम्लाह (जुमलों-)- sentence
इमला - taking notes,writing,
मतला - The opening SHE'R of a GHAZAL .
मक़ता -last line of a GHAZAL, which generally contains the poet's pen-name.
मिसरा One line of a couplet, or verse. 
गज्लाक्षरी-  (निरर्थक शब्द) ,new word invented by me...


6 टिप्‍पणियां:

unkavi ने कहा…

बचपन के खेल साथी छुटे सारे
अब सारे रकीब हुए फिरते हैं
तुम आये हो मेरे दोस्त बनके
जिन्दगीं दोस्ती से मिलती है
आओ फिर दोस्ती दोस्ती खेलें .

simply loved it.

Kailash C Sharma ने कहा…

बचपन के छुटे खेल-साथी सारे
अब सारे रकीब हुए फिरते हैं
तुम आये हो मेरे दोस्त बनके
जिन्दगीं अब खिलखिलाती है
आओ फिर दोस्ती दोस्ती खेलें

बहुत सुन्दर खेल ..सुन्दर अहसास बचपन की फिर याद दिला गए..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

अन्ताक्षरी खेलेंगे शायरी की
शुरू करना तुम इक मतले से
मक़ता मैं ही अक्सर बोलूंगी
मिसरे से मिसरा जोड़ जोड़ के
गजलों की गज्लाक्षरी हम खेलें
--
बहुत सुन्दर!

संजय भास्कर ने कहा…

बचपन की फिर याद दिला दी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर खेल ...

बहुत प्यारी नज़्म...और निरर्थक शब्द भी कमाल का ..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

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