मंगलवार, अप्रैल 12, 2011

शहद सा तुम्हारा नाम



शहद सा तुम्हारा नाम

सालों से चिपका पड़ा है

मेरे सूखे ,ज़र्द होंठों से

इक दिन दिल पक्का कर

हटाने की कोशिश भर की थी

........सारे होंठ छिल गये हैं

और अब  शहद के साथ- साथ

खारा स्वाद भी आता है जीभ पे !


ज़ोया****

20 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बड़ी मीठी सी रचना .. :):)

एम सिंह ने कहा…

अच्छे लेखन के लिए आप बधाई के पात्र हैं.
मेरा ब्लॉग भी देखें दुनाली

Vivek Jain ने कहा…

सुंदर!
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

यशवन्त माथुर ने कहा…

और अब शहद के साथ- साथ

खारा स्वाद भी आता है जीभ पे !

कमाल की पंक्तियाँ हैं !

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर एहसास|

राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|

Kajal Kumar ने कहा…

:)

इमरान अंसारी ने कहा…

क्या बात है.....सुभानाल्लाह......कुछ ताजगी महसूस हुई है इस पोस्ट से......कुछ अलग हटकर......तस्वीर ने चार चाँद लगा दिए हैं ........बहुत पसंद आई ये पोस्ट.....वाह

वन्दना ने कहा…

उफ़ कमाल करती हो।

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (14-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

M VERMA ने कहा…

एहसास की खूबसूरत रचना

रश्मि प्रभा... ने कहा…

swaad chhile hothon ka shahad ke sang ... amazing

***Punam*** ने कहा…

ढेर सारी मिठास भरी रचना..लें कुछ खारापन भी है इसमें...!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सशक्त रचना!

Dr Varsha Singh ने कहा…

कमाल के भाव लिए है रचना की पंक्तियाँ .......

venus****"ज़ोया" ने कहा…

aap sab ne apnaaa kimati nikalaa meri rchnaa ke liye...bhaaw smjhe...aur sraahaa......aap sab ka tah e dil se shurkiyaaaa
take care

हरीश सिंह ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

जितेन्द्र देव पाण्डेय 'विद्यार्थी' ने कहा…

क्या कहें की कलम साथ नहीं देती
खूबसूरत रचना

ebtedaa..... ने कहा…

thiz z really beautiful.....amazing...ab kya kahoon...keep it up

ebtedaa..... ने कहा…

jst beautiful....amazing

anu ने कहा…

........सारे होंठ छिल गये हैं

और अब शहद के साथ- साथ

खारा स्वाद भी आता है जीभ पे !

बेहतरीन रचना ......

कौशलेन्द्र ने कहा…

पुरानी स्मृतियों की त्वचा कभी पृथक नहीं हो पाती .......बलात पृथक करने से होठ छिलेंगे ही ..........मीठे दर्द की अनुभूति के साथ एक अच्छी रचना.