आज पूरी दोपहर आँखें महकती सी रही
इक खुशबू थी की पूरा दिन फैलती रही
अगला कदम उठाऊं तो मिराज़ दिखता
इतनी बार आँखें धोईं .कितनी बार मलीं
पर जाने कैसी खुसबू थी की बस हटी नही
पूरा दिन महकता रहा फिर पूरी शाम महकी
आज कुछ बुरा नही लगा मुझे कुछ भी नही
ना सड़क का ट्रैफिक..ना स्टुडेंट्स की किचकिच
चिलचिलाती धूप भी मानो रेशम हो गयी हो
फिर यूँ लगा खुशबू धूप से मिल गयी हो और
आँखों से गाल तक इक सुनहेरी तह जम गयी
तादीन चमकता रहा .मेरा तारात महकती रही
यहांतक के शाम घर पहुँचते .....रोज़ की तरह
पड़ोसन का आदतन घूरना भी बुरा नही लगा
वो खुशबू मेरे साथ साथ घर तक आ पहुंची
हथेलियाँ से चेहरा छुआ ..कुछ महसूस हुआ
वो धूप सी चमक उँगलियों पे चिपक गयी
कितनी जानी पहचानी सी थी ये चमक
अचानक नज़र सामने पड़े कलेंडर पर पड़ी
आह!तो ये बात है.....मुस्कुरा उठी अकेले ही
आज के दिन ही तुम्हारी आँखों ने छुआ था
मेरी आँखों को सो आज तक महक रही हैं
तुम्हारी आँखों का वो स्पर्श .......हर साल
मेरी आँखों को इस तरह महका जाता है
ज्यूँ कहता हो ........."हैप्पी एनिवर्सरी"
और कहता हो ये दिन यूँ ही याद रखना !
10 टिप्पणियां:
bahut khoob!
"हैप्पी एनिवर्सरी"
-बधाई एवं शुभकामनाएँ.
दिल और दिमाग की उथल पुथल को शव्दों में अच्छा व्यक्त किया है अच्छा लगा बधाई
कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।
aap sab kaaaa tah e dil se shurkiyaaa............aapki is hounslaa afjaayi ki shukrguzaar hun
take care
Joyaaa! dekhaa na! puraani yaaden zindagi ko kitnaa boost up karti hain.Kuchh hi din pahle likhaa thaa-"vo ek pal...bayaan kyaa karun...." what a similarity of feelings.Is reshami si rachanaa ke liye meraa aashirvaad...
kahaan gum hain aap...??
बहुत सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति
आभार
शुभ कामनाएं
bahut sunder.
yh tho sach hai ki aap ne likha bahut sunder hai magar muje yh kuch kuch GULZAR sahab ki ek nazam se milta julta lagta...well keep writting and keep reading as well bcoz if you want to become a good writer you should have to a good reader as well:)...take care
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