मंगलवार, जुलाई 26, 2011

फिर यूँ हुआ



फिर यूँ हुआ के चाँद धीरे धीरे ढल गया
ठीक उसी तरह जिस तरह ढलते हैं 
हर रात  आंसू आँख से होंठ तक
सुबह के लिए  खारापन  छोड़ कर

अगली रात सब चाँद को ढूंढते रहे
ना अमावास थी न चंद्रग्रहण 
ना बादल ही थे  आसमान में 
पर चाँद कहीं न दिखा..कहीं नही 

सुना है  उसके बाद फिर कभी 
आंसू भी नही ढले आँख से 
ना सुबह ने कभी खारापन ही चखा 
जाने क्या हुआ उस रात दोनों में !



जोया ***



26 टिप्‍पणियां:

sushma 'आहुति' ने कहा…

उस रात की सुंदर अभिवयक्ति..

रश्मि प्रभा... ने कहा…

सुना है उसके बाद फिर कभी
आंसू भी नही ढले आँख से
ना सुबह ने कभी खारापन ही चखा
जाने क्या हुआ उस रात दोनों में !
bahut hi badhiyaa

इमरान अंसारी ने कहा…

ज़ोया जी......क्या खूब आंसू और चाँद......दिल को छू गयी ये नज़्म........बहुत खूब|

Vaanbhatt ने कहा…

चाँद दिल में उतर गया...लगता है...

अबयज़ ख़ान ने कहा…

अच्छा लिखती हो.. बहुत खूब लिखती हो.. उससे भी खूबसूरत बात.. ब्लॉग बहुत खूबसूरत है।

SAJAN.AAWARA ने कहा…

mam pahli bar apke blog par aya hun.. achi lagi apki ye kavita...
aaj se hi follow kar raha hun...
jai hind jai bharat

abhi ने कहा…

यह तो राज की बात है...पता लगे तो मुझे भी अवश्य बताएं..

:)

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 25/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

चाँद को प्रतीक बना कर मन के रहस्य की सुकोमल
अभिव्यक्ति.

prerna argal ने कहा…

सुना है उसके बाद फिर कभी
आंसू भी नही ढले आँख से
ना सुबह ने कभी खारापन ही चखा
जाने क्या हुआ उस रात दोनों में !
बहुत सुंदर उस रात की गहन अभिब्यक्ति /दिल को छु गई /बहुत अच्चा लिखा आपने /इतनी अच्छी रचना के लिए बधाई आपको /

please visit my blog.thanks
www.prernaargal.blogspot.com

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत अभिव्यक्ति

रेखा ने कहा…

बहुत खुबसूरत प्रस्तुति ....

alka sarwat ने कहा…

उफ़ क्या कविता है..!!!!!!

मुबारक

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

मैं पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ , सच कह रहा हूँ कि आपकी नज्मो ने मुझे बाँध लिया है .. अब आपके ब्लॉग पर आते रहूँगा .. इस नज़्म ने आँखे गीली कर दी .. क्या कहूँ.

बधाई !!
आभार
विजय
-----------
कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

Amrita Tanmay ने कहा…

khubsurat rachana

Patali-The-Village ने कहा…

दिल को छू गयी ये नज़्म| धन्यवाद|

बेनामी ने कहा…

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बेनामी ने कहा…

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VenuS "ज़ोया" ने कहा…

sushma ji...dhanywaad

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

रश्मि प्रभा.,,, अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com)....... prerna argal..aap sab ka tah e dil se shukriyaa

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

संगीता स्वरुप ( गीत )....रेखा.... Amrita Tanmay ...aap sab bahut bahut dhanywaad

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

Patali-The-Village ......Samir.......benaami.....aap mere blog tak aaye..srahaa...bahut bahut shukriyaa

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

Vijay Kumar Sappatti .....aapke shabd pr ke...skoon milaa...ki mera likhaa bhaawnaaye liye he...bahut bahut shurkiyaa

VenuS "ज़ोया" ने कहा…

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ji...... abhi......इमरान अंसारी........aaap ne hmeshaa...mera hounslaa bdhyaaa he...aur likheko srahaa he..yahi aur taaqat deta he...aage likhne me.....dil se shukriyaa